ज्ञान-विज्ञान को लेकर भारत प्राचीन काल से ही शीर्ष स्थान पर रहा है, लेकिन अधिकांशतः इतिहास को बदल कर सामने रख दिया गया है , जिससे इतिहास के पन्नों के साथ विश्व में भारत गरीबों, भूखों और मूर्खों का देश प्रचारित होता चला गया। इससे भी बड़े आश्चर्य और दुःख की बात यह है कि भारत आज़ाद हुआ, तो स्वतंत्र भारत की सरकार ने कभी खंडन नहीं किया कि भारतीय मूर्ख नहीं, बल्कि विद्वान् रहे हैं, स्वाभिमानी रहे हैं, स्वावलंबी रहे हैं। अब तक इस ओर ध्यान तक नहीं दिया गया, क्योंकि भारत स्वतंत्र भले ही हो गया, लेकिन व्यवस्था विदेशी विचारधारा के लोगों के ही हाथों में रही, जिससे युवा पीढ़ी अपने अतीत को लेकर गौरव की अनुभूति नहीं कर पा रही। जिस युवा के हृदय में अपने पुरुखों के प्रति सम्मान नहीं होगा, वो युवा और वो देश विकास नहीं कर सकता, ऐसे में बेहद आवयश्क है कि सरकार अतीत के पन्नों पर जमी धूल को साफ कर युवाओं के सामने सच्चाई रखे।
airplane का आविष्कार ऑरविल राइट और विलबर राइट बंधुओं ने किया था। हवाई जहाज के आविष्कार को लेकर ज्यादातर किताबों में यही उत्तर लिखा गया है। पूरा दुनिया ने भी अब राइट बंधुओं को ही हवाई जहाज का आविष्कारक के रूप में मान्यता दे चुका है। पर सच्चाई इससे कोसो दूर है आइये हम आपको बताते है की हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया था
अमेरिका में नहीं बल्कि भारत में airplane का आविष्कार हुआ था जिसे मुंबई स्थित चौपाटी से उड़ाया गया था.
शिवकर बापूजी तलपड़े(Shivkar Bapuji Talpade) मुम्बई स्कूल ऑफ आर्ट्स के अध्यापक और वैदिक विद्वान रह चुके थे। उन्होँने हवाई जहाज का निर्माण किया, जिसे उन्होने मरुतसखा नाम दिया। मरुतसखा नाम के हवाई जहाज की पहली उड़ान का प्रदर्शन मुंबई चौपाटी पर तत्कालीन बड़ौदा नरेश सर शिवाजी राव गायकवाड़ और लालजी नारायण के सामने किया गया था। हवाई जहाज पन्द्रह सौ फ़ीट ऊँचाई तक गया था, जबकि राइट बंधुओं के हवाई जहाज ने केवल एक सौ बीस फुट ऊंची उड़ान भरी थी। बाद में बापूजी तलपड़े की पत्नी का निधन हो गया, तो उन्होंने इस दिशा में कार्य बंद कर दिया। 17 दिसंबर 1918 को उनका निधन हो गया, जिसके बाद आविष्कार सम्बन्धी जो भी कागज़,दस्तावेज और सामान था उनके परिजनों ने अंग्रेजों को बेच दिया, जिससे उनके नाम के साथ वह आविष्कार भी इतिहास में दफन हो गया। इस विषय पर हाल ही में एक फिल्म भी बनी है, जिसका नाम हवाईजादा है, यह फिल्म बहुत हद तक सच को सामने लाने में सफल रही है।
राइट ब्रदर्स ने जिस हवाई जहाज का आविष्कार किया था वह 17 दिसंबर, 1903 में उड़ाया गया था लेकिन इससे करीब 8 साल पहले ही शिवकर बापूजी तलपडे नाम के एक मराठा ने अपनी पत्नी की सहायता से 1895 में हवाई जहाज को बनाया जो 1500 फीट ऊपर उड़ा और फिर वापस नीचे गिर गया. मुंबई स्थित चिर बाजार में रहने वाले शिवकर बापूजी तलपडे अपने अध्ययन काल से ही हवाई जहाज बनाने की विधि को जानने और समझने के लिए इच्छुक थे. आपको बता दें कि भारत में विमान शास्त्र के सबसे बड़े ज्ञाता महर्षि भारद्वाज ने सबसे पहले इस विषय पर पुस्तक लिखी और फिर इसके बाद अन्य ज्ञाताओं ने सैकड़ों पुस्तकों के जरिए विमान बनाने की तकनीक को और अधिक विस्तृत तरीके से पेश किया. भारत में विमानशास्त्र से संबंधित जो भी पुस्तकें उपलब्ध हैं उनमें से सबसे पुरानी किताब 1500 वर्ष पहले लिखी गई थी. महर्षि भारद्वाज की पुस्तक शिवकर बापूजी तलपडे के हाथ लगी गई और उन्होंने इसका अध्ययन भी किया. इस पुस्तक के बारे में बापूजी तलपडे ने कुछ बेहद रोच बातें कहीं जैसे:
कैसा महसूस होगा जब हवा से आपकी बात होगी ?
पुस्तक के आठवें अध्याय के सौ खंडों में विमान बनाने की तकनीक का विस्तृत वर्णन है और इस पूरी पुस्तक में विमान का निर्माण करने से जुड़े 500 सिद्धांतों को शामिल किये गये है.

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